लोकसभा ने एनआईए संशोधन विधेयक २०१९ को मंजूरी दी

नई दिल्ली, १५ जुलाई ।
तीखी नोकझोंक के बाद लोकसभा ने सोमवार को ‘एनआईए संशोधन विधेयक २०१९’ को मंजूरी दे दी जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को भारत से बाहर किसी गंभीर अपराध के संबंध में मामले का पंजीकरण करने और जांच का निर्देश देने का प्रावधान किया गया है । निचले सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि आज जब देश और दुनिया को आतंकवाद के खतरे से निपटना है, ऐसे में एनआईए संशोधन विधेयक का उद्देश्य जांच एजेंसी को राष्ट्रहित में मजबूत बनाना है । इससे पहले बिल पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी के बीच नोकझोंक भी देखने को मिली । विपक्ष की शंका का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि इस कानून का इस्तेमाल आतंकवाद को खत्म करने के लिए किया जाएगा, मगर यह भी नहीं देखा जाएगा कि यह किस धर्म के व्यक्ति ने किया है । गृह राज्य मंत्री रेड्डी कहा, आतंकवाद का कोई धर्म, जाति और क्षेत्र नहीं होता । यह मानवता के खिलाफ है । इसके खिलाफ लड़ने की सरकार, संसद, सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है । रेड्डी ने कुछ सदस्यों द्वारा चर्चा के दौरान दक्षिणपंथी आतंक और धर्म का मुद्दा उठाए जाने के संदर्भ में कहा कि सरकार हिंदू, मुस्लिम की बात नहीं करती है । सरकार को देश की १३० करोड़ जनता ने अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी है और जिसे चौकीदार के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वीकार किया है । देश की सुरक्षा के लिए सरकार आगे रहेगी । रेड्डी ने कहा कि सरकार आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने की जिम्मेदारी हाथ में लेगी । एनआईए को शक्तिशाली एजेंसी बनाया जाएगा । सदन ने मंत्री के जवाब के बाद विपक्ष के कुछ सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया । इससे पहले विधेयक को विचार करने के लिए सदन में रखे जाने के मुद्दे पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मत-विभाजन की मांग की । गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि इस पर मत-विभाजन जरूर होना चाहिए । इसकी हम भी मांग करते हैं ताकि पता चल जाए कि कौन आतंकवाद के साथ है और कौन नहीं । मत विभाजन में सदन ने ६ के मुकाबले २७८ मतों से विधेयक को पारित किए जाने के लिए विचार करने के लिए रखने की अनुमति दे दी । गृह राज्य मंत्री रेड्डी ने कहा कि इस संशोधन विधेयक का मकसद एनआईए अधिनियम को मजबूत बनाना है । उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद बहुत बड़ी समस्या है, देश में ऐसे उदाहरण हैं जब मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री आतंकवाद के शिकार हुए हैं । आतंकवाद आज अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय समस्या है । ऐसे में हम एनआईए को सशक्त बनाना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि जहां तक एनआईए अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति का विषय है तो हम सिर्फ प्रक्रिया को सरल बनाना चाहते हैं । कई बार जज का तबादला हो जाता है, प्रमोशन हो जाता है, तब अधिसूचना जारी करनी पड़ती है और इस क्रम में दो तीन माह चले जाते हैं । हम इसे रोकना चाहते हैं । उन्होंने स्पष्ट किया कि एनआईए अदालत के जजों की नियुक्ति संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ही करते रहेंगे, जिस तरह अभी प्रक्रिया चल रही है । गृह राज्य मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के विषय पर केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर काम करेगी । दोनों में तालमेल रहेगा । उन्होंने पाकिस्तान के आतंकवाद से संबंधित समझौते पर दस्तखत करने या नहीं करने के सवाल पर कहा कि पुलवामा और बालाकोट हमलों के बाद भारत ने बता दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ जांच कैसे होती है । उनका इशारा सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की ओर था । रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस के समय ही एनआईए कानून में कई कानूनों को जोड़ा गया था लेकिन उस समय इस पर ठीक से काम नहीं हुआ और हम संशोधन लेकर इसे उन्नत बना रहे हैं । उन्होंने बताया कि एनआईए ने २७२ मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की । इनमें ५२ मामलों में फैसले आए और ४६ में दोष सिद्ध किया जा सका । रेड्डी ने बताया कि ९९ मामलों में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है । उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक से एनआईए की जांच का दायरा बढ़ाया जा सकेगा और वह विदेशों में भी भारतीय एवं भारतीय परिसंपत्तियों से जुड़े मामलों की जांच कर सकेगी जिसे आतंकवाद का निशाना बनाया गया हो । उन्होंने कहा कि इसमें मानव तस्करी और साइबर अपराध से जुड़े विषयों की जांच का अधिकार देने की बात भी कही गई है ।

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